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सबसे अच्छा म्यूच्यूअल फण्ड अपने लिए कैसे चुने

हम जब भी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश की सोचते है ,तो हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या आती है ,अपने लिए सही म्यूच्यूअल फण्ड चुनते की ।आज बाजार में इतने सारे म्यूच्यूअल फण्ड है ,उनमें से किसी एक का चुनाव सचमुच महाभारत जैसा ही है ।दूसरे बात हमें यस भी पता नहीं होता कि किस parameters के आधार पर हम अपपारंपरिकने लिए best म्यूच्यूअल फण्ड चुनें ।फलस्वरूप हममें से अधिकांश सबसे बड़ी गलती ये करते है कि केवल रिटर्न के आधार पर एक म्यूचुअल फंड का चयन कर लेते है और वह भी पिछले कुछ महीनों या वर्षों के performance आधार पर ।जबकि कुछ ऐसे भी निवेशक हैं जो विभिन्न शोध फर्मों द्वारा दी गई रेटिंग पर विचार करते हैं। मैं यह नहीं कहता हूँ के ये रेटिंग खराब होती है ,ये रेटिंग अच्छी हो सकती है, लेकिन कई अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर भी हैं जिन्हें अपने लिए सही म्यूच्यूअल फण्ड चुनते समय हमें देखना चाहिए।

सबसे अच्छा म्यूचुअल फंड चुनने के लिए प्रमुख कारक

1)Identify Goal

सबसे पहले आप निवेश के लक्ष्य (goal ) को पहचाने ।यह सही म्यूच्यूअल फण्ड चुनने सबसे महत्वपूर्ण पहला कदम है। एक निवेश लक्ष्य के बिना किया गया एक अच्छा फंड चयन पूरी तरह से बेकार है। अतः सबसे पहले ये पहचानना होगा कि

1)आपका लक्ष्य क्या है जैसे बच्चों की पढ़ाई ,नया मकान बनाना ,लड़की की शादी इत्यादि ।

2)आपको अपना लक्ष्य हाशिल करने की लिए कितना समय आपके पास है

3) लक्ष्य को हाशिल करने के लिए कितनी राशि की जरूरत आपको पड़ेगी ।

4)) लक्ष्य को हाशिल करने के लिए कितनी राशि अधिकतम आप सालाना निवेश कर सकते है और सबसे महत्वपूर्ण आप इन राशि पर कितना जोखिम ले सकते है ।

यदि आपके पास इन सभी सवालों का जवाब है ,तब हम next perameter की ओर चलते

2)Expense ratio & Fees

एक म्यूचुअल फंड को संचालित करने में विभिन्न खर्च होते है जैसे फंड प्रबंधन शुल्क, बिक्री खर्च, फंड लेनदेन लागत, निवेशक संचार लागत, संरक्षक शुल्क और रजिस्ट्रार शुल्क।

expense ratio को scheme संचालित करने के लिए प्रति यूनिट लगने वाली खर्च के रूप में परिभाषित किया जाता है और यह आपके निवेश से लिया जाता है। म्यूचुअल फंड के

expense ratio की calculation समय-समय पर की जाती है लेकिन यह दैनिक रूप से यह NAV पर चार्ज किया जाता है। सालाना expense ratio का खुलासा मार्च और सितंबर मे किया जाता है और इसे औसत साप्ताहिक शुद्ध संपत्तियों के धन के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। सेबी के नियमों के मुताबिक, इक्विटी फंड का अधिकतम व्यय अनुपात 2.5% हो सकता है, और डेट फंड के लिए यह 2.25% हो सकता है।

expense ratioआपको यह जानने में सहायता करता है कि आप अपने निवेश को manage करने के लिए हर साल एक कितना भुगतान करते हैं। मान लीजिए कि आपने एक फंड योजना में 1,00,000 रुपये का निवेश किया है, जिसका expense ratio 1.9% है ।इसका मतलब आप अपने निवेश को manage करने के लिए हर साल 1,900 रुपये म्यूचअल फण्ड कंपनी को दे रहे है ।अगर आपके म्यूचअल फण्ड का profit 17%, तो म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपको expense ratio काटकर आकपो 15.1% ही देगी । यदि आप लंबे समय तक निवेश करते है तब compounding के बाद ये एक मोटी राशि बन जाती है ।

सीधे तौर पर कहे तो जितना ही आपका expense ratio कम होगा उतनी ही अधिक आपको फायदा होगा ,अतः म्यूच्यूअल फण्ड चुनते समय कम से कम expense ratio वाला फण्ड ही चुने ।

3)Entry & Exit load

फंड खरीदने के दौरान एक छोटी राशि चार्ज की जाती है, जिसे entry load कहा जाता है। यह राशि प्रारंभिक निवेश से कटौती की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि 1000 रुपये का निवेश एक फंड में निवेश किया जाता है जिसमें 2 प्रतिशत का entry load होता है तो आपके निवेश से 20रुपये काटकर सिर्फ 980 रुपये का ही वास्तविक निवेश आपके खाते में किया जाएगा।

इसी तरह, Exit load वाले म्यूच्यूअल फण्ड में जब हम अपना पैसा निकलते है (redemption ) तो हमें कुछ राशि Exit load के रूप में म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को देनी पड़ती है । जैसे कि हमने यदि 1000 रुपये की राशि निवेश किया जो बढ़कर 1100 हो गई है

अगर फंड में 1.8 प्रतिशत का एक्जिट लोड है, तो रिडेम्प्शन के समय 19.80 रुपये (1100 रुपये का 1.8 प्रतिशत) काटकर हमें सिर्फ 1080.20 रुपये दिया जाएगा।

इक्विटी फंड के लिए entry load आपके द्वारा खरीदे गए मूल्य के 0 (कोई लोड) से 2.5% तक होता है। जबकि exist load 0 % से 4% तक हो सकते है ।आमतौर पर exist load को period के साथ जोड़ा जाता है और अधिकांश म्यूचअल फण्ड कंपनी निवेश की अवधि 01 साल से अधिक होने पर आपसे कोई भी exist load नहीं लेता है ।

अलग अलग scheme में entry /exist load अलग अलग होता है ।आप अपने लिए म्यूचअल फण्ड चुनते समय exit load का भी धयान रखे और जहाँ तक हो सके सीधे (direct ) AMC से ही scheme ले ,जिससे आपको entry load नहीं देना पड़े ।

4)Fund Manager and Track Record

आपके म्यूच्यूअल फण्ड के लिए एक अच्छा Fund Manager होना बहुत जरूरी है, क्योंकि वही सारे अंतिम decision लेता है,उसके एक सही decision से काफी फायदा हो सकता हैतो वहीं दूसरी ओर एक गलत decision से आपके फण्ड को काफी नुकसान भी हो सकता है , इसलिए उसकी विशेषज्ञता, अनुभव और standpoints , फण्ड के प्रदर्शन में बहुत मायने रखते हैं। अतः निवेश करने से पहले अपने फण्ड मैनेजर के बारे में कुछ बाते आपको जरूर पता कर लेनी चाहिए ।

फंड मैनेजर का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड क्या है?
क्या फंड मैनेजर बेंचमार्क रिटर्न के अनुरूप result प्रदान करता है ।
क्या फंड बड़ी इंडेक्स की तुलना में अधिक अस्थिर (volatile ) था?
उन योजनाओं का प्रदर्शन कैसा है जिसको वह वर्तमान में प्रबंधित कर रहे हैं या जिनकोअतीत में प्रबंधित किये थे।

इस जानकारी से निवेशको को पता चल जाएगा कि आपका फण्ड मैनेजर बिभिन्न परिस्थितियों में कैसे कार्य करता है। साथ ही उसके कारोबार के ऐतिहासिक रूप का पता आपको चल जाता है ।

हालांकि, म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में हमेशा ये याद रखे कि पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणामों की कोई गारंटी नहीं है। इस कारण से, किसी भी फंड को खरीदने से पहले, इसarticle में दिए गए सभी अन्य पैरामीटर गौर करें ।

5)Performance Ranking

फण्ड का पिछला प्रदर्शन एक उपाय है जिससे हमें पता चलता है एक फंड ने अतीत में कैसा प्रदर्शन किया है। प्रदर्शन को महीनों या वर्षों की अवधि में मापा जाता है। लंबी अवधि के प्रदर्शन तुलना में अधिक जरूरी हैं।

फंड के CRISILरैंक को भी चेक कर ले ,क्योकि क्रिसिल रैंक कई पैरामीटर चेक करने के बाद जारी की जाती है जैसे कि Return Score (SRS), Mean Return and Volatility, Portfolio Concentration Analysis, Exposure to Sensitive Sector, Liquidity Analysis & Asset quality इत्यादि

फण्ड का आकलन करते समय, दीर्घकालिक ऐतिहासिक प्रदर्शन पर ध्यान करें। विशेष रूप से, पिछले 5 से 10 वर्षों में फंड के net रिटर्न देखें। ध्यान दें कि म्यूचुअल फंड दीर्घकालिक निवेश हैं। लंबे समय मे फंड नके बढ़ते और गिरते बाजारों के दौरान प्रदर्शन पर भी ध्यान दे ।

आप विभिन्न रैंकिंग और कुछ म्यूचुअल फंड शोध वेबसाइटों पर भी इन रैंकिंग और औसत रिटर्न पा सकते हैं

6)AUM (Scheme Asset Under Management) Size

यह हमेशा सुझाव दिया जाता है कि समझदार निवेशकों को अपने पैसे को उस फंड में रखना चाहिए जो न तो बहुत छोटा है और न ही इसके आकार में बहुत बड़ा है। हालांकि हमें नहीं लगता किएक फंड के आकार और उसके प्रदर्शन के बीच कोई निश्चित संबंध है। फिर भी बीच का मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ होता है ।

म्यूचुअल फंड में निवेश करना एक बेहतरीन साधन है कमाई करने का ।और आज आप एक महान निवेशक बनने की अपनी यात्रा अग्रसर हैं। यदि आप उपर्युक्त पैरामीटर पर ध्यान देकर म्यूचुअल फंड चुनते हैं, तो आप निश्चित रूप से समय के साथ अच्छे रिटर्न पाएंगे ।हालांकि, कोई भी योजना या किसी विशेष क्षेत्र के भविष्य की भविष्यवाणी नहीं कर सकता जहां आप निवेश कर रहे हैं। यही कारण है कि, प्रत्येक तिमाही या आधे साल में चयनित म्यूचुअल फंड की समीक्षा करने की सलाह दी जाती है।

दोस्तो आज का यह अंक कैसा लगा।

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धन्यवाद

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One comment

  1. bahut achha laga aapka tips. aapka google adsence ka approve mila….

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