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Mutual fund क्या है इसके फायदे और नुकसान

आजकल हम रोजाना TV पर Mutual fund का add देखते है ,ऐसे में हमें म्यूच्यूअल फण्ड आकर्षित तो करती है ,लेकिन हम में से ज्यादातर लोग पूरी जानकारी के अभाव में म्यूच्यूअल फण्ड में invest करने से घबराते है ।म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में कई गलत धारणाएं

हमारे मन में होती है, आज के इस अंक में मैं आपको म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में बताने जा रहा हूँ ।चूँकि पूरे म्यूच्यूअल फण्ड की सारी जानकारी देना एक ही अंक में संभव नहीं है ,अतः मैं एक mutual fund series चलाने जा रहा हूँ ,जिसमे आपको step by step म्यूच्यूअल फण्ड की सारी जानकारी देने का प्रयास करूंगा ।

अब आते है हम आज के इस अंक पर ।आज का यह म्यूच्यूअल फण्ड का पहला लेख है ,अतः इस लेख को पूरा पढ़ लेने के बाद आप जान जायेगे की म्यूच्यूअल फण्ड क्या है ,अपने देश में म्यूच्यूअल फण्ड का structure क्या है ,म्यूच्यूअल फण्ड के क्या लाभ और नुकसान है ,म्यूच्यूअल फण्ड कितने प्रकार के होते है।

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है म्यूच्यूअल की संरचना और लाभ हानि

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ,यह एक पारस्परिक (mutual ) फण्ड है ,जिसमे हमारे और आपके जैसे बहुत सारे लोगो द्वारा ,एक जगह पैसा इकठ्ठा किया जाता है और इस जमा किये हुए पैसे का इस्तेमाल बाज़ार में निवेश करके मुनाफा कमाने के लिए किया जाता है ।

अब हमने म्यूच्यूअल फण्ड का मोटा मोटी धारणा समझ लिया अब हमारे मन में ये उत्सुकता होगी कि म्यूच्यूअल फण्ड काम कैसे करता है ,फिर हमने जो पैसा जमा किया है उसकी सुरक्षा कौन करेगा ,क्या मैं भी एक म्यूच्यूअल फण्ड खोल सकता हूँ इत्यादि ।इन सबको समझने की लिए हमे सबसे पहले अपने देश मे म्यूच्यूअल फण्ड की संरचना (structuar ) समझना होगा ।

भारत मे म्यूच्यूअल फण्ड की मौलिक संरचना

अपने देश में म्यूच्यूअल फण्ड को SEBI ( securities and exchange board of India ) regulate करती हैं ।म्यूच्यूअल फण्ड को सुचारू रूप से चलाने के लिए सेबी ने काफी guidelines जारी किए है ,जिसे SEBI MF Regulation 1996 के नाम से जाना जाता है ।इस रेगुलेशन के अनुसार अपने देश मे मुख्यतः

म्यूचअल फण्ड तीन स्तरीय होते है

1)Sponsor

2) Trustee

3)AMC (Asset Management Company )

Sponsor –

म्यूचअल फण्ड में स्पांसर की भूमिका सबसे अहम होती है ।यह सबसे पहले सेबी से approval लेकर trustee को नियुक्त करता है ,फिर AMC का निर्माण करता है ।

चूँकि स्पांसर की भूमिका म्यूचअल फण्ड में सबसे महत्वपूर्ण होती है अतः सेबी ने स्पॉन्सर की योग्यता संबंधित कुछ गाइडलाइंस जारी किए है ,उसमे से कुछ है ।

A)स्पॉन्सर वहीं व्यक्ति बन सकता है ,जिसका बिज़नेस में पिछले 5-7 सालों के बढ़िया track record हो।

B)व्यक्ति ने पिछले 3-5 सालों के दौरान अच्छा profit कमाया हो ।

स्पांसर के पास काफी अच्छा पैसा होना चाहिए

क्योंकि स्पॉन्सर AMC के Net Worth के कम से कम 40 % राशि का योगदान देता है ।

Trustee –

स्पॉन्सर सबसे पहले एक पब्लिक ट्रस्ट के रूप में अपने म्यूच्यूअल फण्ड का पंजीकरण ,भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 के तहत करवाता है ।फिर इस ट्रस्ट के लिए ट्रस्टी का चुनाव अपनी मर्जी से करके सेबी से अनुमोदन लेता है ,लेकिन सेबी यहाँ ध्यान देता है कि ये ट्रस्टी किसी भी प्रकार से स्पॉन्सर से संबंधित नहीं होने चाहिए।

ट्रस्टी के काम

1)ट्रस्टी का मुख्य काम निवेशको के लाभ की सुरक्षा करना है ।इसके लिए ट्रस्टी AMC बनाता है और ये तय करता है AMC कैसे काम करेगी ,ताकि सेबी के नियमों का पालन और निवेशको के हित की सुरक्षा साथ साथ हो सके ।

2)AMC अच्छे ढंग से काम करे ,इसके लिए ट्रस्टी AMC को सारी सुबिधा देता है ,ताकि AMC बढ़िया से रिसर्च करने के बाद बाजार में पैसा लगा सके ।

3)ट्रस्टी ,AMC के सभी देन लेन का रिकॉर्ड हरेक 06 महीनों पर सेबी को देता है ।

4)AMC म्यूचअल फण्ड की कोई भी स्किम ट्रस्टी के approval के बाद ही launch करती है ।

AMC –

AMC ट्रस्ट का investment मैनेजर होता है ।यह म्यूचअल फण्ड में निवेशको के पैसा को बाजार में सही जगह निवेश करता है ।AMC का चुनाव सेबी से approval लेकर स्पांसर या ट्रस्टी ,दोनो में से कोई भी एक करता है।AMC के अंतर्गत CIO (chief investment officer ) ,Analytics एवं fund maneger होते है ,ये सभी सामूहिक रूप से म्यूच्यूअल फण्ड के विभिन्न स्कीमो को manage करते है

CUSTODIAN –

एक AMC में जितने भी शेयर्स और सिक्योरिटीज होती है ,उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कस्टोडियन की होती है ।

RTA (Registrar And Transfer Agent )-

RTA का काम सभी निवेशको के रिकॉर्ड को अपडेट रखना होता है ।जैसे किसी निवेशक ने कब कौन सा plan खरीदा है ,कब उसने redemtion किया इत्यादि ।

Auditor –

ऑडिटर का काम सभी तरह के transaction की जाँच (audit) करना है ।

Fund Accountant –

फण्ड अकाउंटेंट का काम म्यूच्यूअल फण्ड के NAV का मूल्य निर्धारित करना है ।

अब मैं समझता हूँ कि आपको अपने देश मे म्यूच्यूअल फण्ड के construction की basic जानकारी हो गई है ।लेकिन म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करके अच्छा पैसा कमाने के लिए यह जरूरी है कि हमें म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में अच्छी जानकारी हो ।तो चले इससे पहले की हम अपनी निवेश की शुरुवात करे उससे पहले म्यूच्यूअल फण्ड के फायदे और नुकसान जानते है ।

म्यूच्यूअल फण्ड के फायदे :-

1) Diversification

म्यूच्यूअल फण्ड की सबसे बड़ी विशेषता है ,इसकी विविधता (Diversification).

अगर आप खुद हीं बाजार जाकर निवेश करना चाहते है ,तो आपको काफी गहराई से research और analysic करना पड़ेगा ,स्वाभाविक है ,इस काम के लिए आपको काफी समय भी देना पड़ेगा ।लेकिन हम में से सभी के पास न तो इतना समय रहता है और ना हीं इतनी जानकारी ।लेकिन एक बार जब आपने म्यूच्यूअल फण्ड खरीद लिया तो आप पाएंगे कि आपके फण्ड मैनेजर बड़ी हीं तसल्ली के साथ पूरी तरह से research और analysic करने के बाद आपका पैसा विभिन्न प्रकार के share ,bond और securities में लगाते है ।

अब इस विविधता को एक simple उदाहरण से समझे ।अगर आप किसी दूध वाले से रोजाना 05 लीटर दूध लेते है और किसी दिन आपका दूध वाला बीमार पर गया तो आपको बिल्कुल ही दूध नहीं मिलेगा ।लेकिन यदि आप 05 अलग अलग दूधवाले से 01 -01 लीटर करके 05 लीटर दूध लेते है तो किसी दिन अगर आपका कोई एक या दो दूधवाला बीमार पर गया तो भी आपको दूध तो मिल हीं जाएगा पर थोड़ा कम मिलेगा ।

यहाँ स्पष्ट हो गया कि अगर हम अपना निवेश बाजार में किसी एक शेयर में करते है तो हमें काफी फायदा भी हो सकता है और नुकसान भी ।लेकिन जब हम अपना पैसा कई अलग अलग शेयर में लगाते है तो एक आध शेअर नुकसान में भी हो तो हमें ज्यादा नुकसान नहीं होता ।

2) Professional Management :-

म्यूच्यूअल फण्ड में आपका पैसा कहाँ लगाना है इसका फैसला आपका फण्ड मैनेजर लेता है ।फण्ड मैनेजर के पास market expert की पूरी एक special team हीं होती है ,जिनका काम ही है market पर research और analysic करते रहना ।इस तरह जब आपने एक बार म्यूच्यूअल फण्ड खरीद लिया तो आप इस टेंशन से बिल्कुल हीं फ्री हो जाते है कि आपको कहाँ कहाँ पैसा लगाना है और कहाँ कहाँ से निकालना है ।

3)Simplicity :-

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश बहुत ही सरल है ,बस आपको म्यूच्यूअल फण्ड के performance को देखना है और निवेश करना है ।हरेक म्यूच्यूअल फण्ड अपना जरूरी analysic data जैसे risk level ,return,price etc आपको खुद ही दे देती है ।

4)Liquity :-

म्यूच्यूअल फण्ड में काफी liquity होती है ,कहने का मतलब है म्यूच्यूअल फण्ड से जब आप चाहो बड़ी हीं आसानी से अपना पैसा निकाल सकते हो ।बस इसके लिए आपको संबंधित म्यूच्यूअल फण्ड में redemption request करना है और आपका पैसा 03-04 दिनों में आपके एकाउंट में वापस पहुँच जाता है ।

5)Cost :-

यदि आप शेयर मार्केट में पैसा लगाते है तो आपको portfolio management service लेनी पड़ेगी ,जो आमतौर पर आपसे आपके कुल निवेश का 02 -04 % सालाना आपसे लेगें इसके अलावा आप जो भी लाभ कमाएंगे उसमें से भी एक हिस्सा वो आपसे लेगें ,जबकि म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगते है तो म्यूच्यूअल फण्ड मैनेजर उपेक्षाकृत कम राशि आपसे expence ratio के रूप में आपसे लेता है ।अगर आपने debts म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगाया है तो ये राशि और भी कम हो जाती है ।

6)Start with small amount-

अगर आप अपना पैसा real estate या शेयर मार्केट में लगाते है तो आपको बड़ी राशि की जरूरत पड़ेगी ,लेकिन म्यूच्यूअल फण्ड आप चाहे तो हरेक महीना 500 रुपये जमा कराके भी शुरू कर सकते है ।

7)Transparent –

म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा invest करने पर ,आपको काफी पारदर्शीयता देखने को मिलेगी ।सभी म्यूच्यूअल फण्ड SEBI के अंतर्गत काम करती है और वह सभी जरूरी जानकारी अपने निवेशको को देने के लिए बाध्य है ।अगर आपने किसी एक म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा लगाया है तो आप बड़ी ही आसानी से जान सकते है कि आपके म्यूच्यूअल फण्ड ने कितने स्टॉक में पैसा लगा रखा है ,जबसे यह म्यूच्यूअल फण्ड स्किम शुरू हुई है तब से इसका प्रदर्शन कैसा रहा है ,स्केम के फण्ड मैनेजर की qualification और track record कैसा रहा है।हरेक म्यूच्यूअल फण्ड की NAV (Net Asset Value ) daily update होती है ।

8)SIP /Lumpsum :-

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश के दोनों ही ऑप्शन होते है ,अगर आपके पास इकठा ही कुछ मोटी रकम आ गई हो तो आप lumpsum निवेश कर सकते हो या आप हरेक महीना कुछ राशि म्यूच्यूअल फण्ड में जमा करना चाहते हो तो आप sip कर सकते हो ।

9)Tax Saving :-

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करके इनकम टैक्स बचाना चाहते हो तो उसके लिए म्यूच्यूअल फण्ड में अलग से स्कीम आती है ELSS (Equity linked saving schemes ) .

इस स्कीम में निवेश करके आप सेक्शन 80c के तहत 1.5 लाख तक कि छूट पा सकते हो ।

म्यूच्यूअल फण्ड से नुक्सान

1)Cost :-

हरेक म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी अपने म्यूच्यूअल फण्ड। स्किम को सही तरीके से चलाने के लिए कुछ post appointment करते है ,जैसे फण्ड मैनेजर कस्टोडियन RTAइत्यादि ।इनके वेतन का और अपने अन्य administration का खर्च चलाने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी अपने निवेशको से expence ratio के रूप पैसे लेती है ,इसके अलावा आप जब भी म्यूच्यूअल फण्ड से पैसा निकालना चाहते है ,तो exit load के रूप में भी कुछ पैसे म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपसे लेती है।अतः हमेशा म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने से पहले चेक कर ले कि संबंधित म्यूच्यूअल फण्ड स्किम में exit load कितना प्रतिशत है ।

2)No Guaranted Return :-

म्यूच्यूअल फण्ड का अधिकांश हिस्सा मार्केट पर निर्भर करता है ,अतः आपको फायदा और नुकसान दोनो ही हो सकते है ,और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपको कितना फायदा मिलेगा

3)No Control :-

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेशक का अपने निवेश पर कोई नियंत्रण नहीं होता है ।कहाँ और कितनी मात्रा में निवेश करना है इसका पूरा ही निर्णय संबंधित फण्ड मैनेजर द्वारा लिया जाता है ।

4)Too Many Fund :-

आज के समय मे इतनी ज्यादा म्यूच्यूअल फण्ड स्किम है कि उनमें से किसी एक को चुनना बड़ा ही कठिन लगता है ।

म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार

1) Open Ended Fund :-

इस म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट्स को साल में किसी भी समय खरीदा और बेचा जा सकता है ,इस प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड Liquidity की दृष्टि से सबसे अच्छे होते हैं। इस फंडस की Maturity तिथि के निश्चित न होने के कारण निवेशक के पास यह तरल नकदी Liquid Cash के रूप में उपलब्ध रहते ह

2)Close-Ended Funds –

इस प्रकार की mutual plan में निर्धारित परिपक्वता (Maturity) अवधि होती है और निवेशक फंड्स केवल नई फंड ऑफ़र अवधि के दौरान खरीद सकते हैं। है।

क्लोज्ड एंडेड स्कीम के यूनिट्स इसके शुरू होने के समय ख़रीदे जा सकते हैं. साल के मध्य में इस योजना पर निवेश नहीं किया जा सकता है. इस फण्ड के यूनिट्स इनके मिच्योरिटी के बाद बेचे जा सकते हैं
इस क्लोज एंडेड म्यूच्यूअल फण्ड का  Redemption एक निश्चित समय के अंतराल पर ही हो सकता है। यह तिथि 3 से 6 वर्ष तक हो सकती है। यह Fund लांच होने के कुछ समय बाद ही निश्चित समय के लिए आवेदन के लिए उपलब्ध होते हैं। हैं ।

3)Interval Funds): –

यह फंड ओपेन और क्लोज़ एंड फंड के मिले-जुले फ़ायदों के साथ आते हैं। जैसा इसके यूनिट को ओपन एंडेड स्कीम की तरह फण्ड कार्यकाल के दौरान पुनः खरीद की जा सकती है. म्यूच्यूअल कंपनी का फण्ड मैनेजमेंट वैद्य समय अंतराल के दौरान पूर्व स्थापित यूनिट होल्डर से शेयर खरीदने की सुविधा देते हैं.

एसेट क्लास के आधार पर म्यूचुअल फंड के प्रकार.

1)Equity fund :-

इस स्कीम में फंड का पूरा धन बाज़ार के इक्विटी Share में Investment कर दिया जाता है । चूँकि यह शेयर बाजार से जुडी योजना है अतः शेयर बाजार मे होने वाले बदलाव का सीधा असर इक्विटी फंड पर पडता है, इसलिए इस फंड से मिलने वाला रिटर्न अस्थिर होता है।

इसे उच्च जोखिम वाला फंड माना जाता है, लेकिन यह उच्च रिटर्न प्रदान भी करता हैं।

2)Debt Funds :-

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में निवेशक कंपनी डिबेंचर्स, सरकारी बॉन्ड और दूसरे निश्चित  आय  देने वाले साधनो में निवेश करते हैं जो सुरक्षित निवेश होता है और निश्चित रिटर्न प्रदान करता  है।

स्कीम उन निवेशकों के लिए बढ़िया  है जो बिना जोखिम उठाए  अधिक  से अधिक अपने निवेश पर कमाना  चाहते हैं। इस स्कीम के अंतर्गत जमा किये गए  फंडस कॉर्पोरेट ऋण स्कीम और सरकारी ऋण स्कीम में  निवेश किया जाता है। यह एक बिलकुल safe  निवेश है  और इसमें निवेशित  धन की वापसी की लगभग गारंटी होती है और जोखिम बहुत ही कम होती हैं डेब्ट फण्ड के अंदर इक्विटी फंड से कम फायदा होता है. लेकिन यही एक रिस्क फ्री निवेश है और यह एक निश्चित आय के लिए सबसे अच्छे निवेश विकल्प हैं।

3)Balanced Fund :-

प्रकार के फंड में एकत्रित फंडस को इक्विटी और डैब्ट दोनों में ही Investment किया जाता है। जिससे निवेशकों को अधिक से अधिक आय कमाने का मौका दिया जा सके।आमतौर पर इस फण्ड में निवेश किये गये धन का 65 से 80 प्रतिशत इक्विटी फण्ड तथा बाक़ी हिस्सों का निवेश डेब्ट फण्ड में किया जाता है।

यदि आप कम रिस्क के साथ अधिक से ज्यादा प्रॉफिट कमाना चाहते हैं. तो आप Balanced Fund में निवेश कर सकते है. Balanced Fund निश्चित प्रतिभूतियां में निवेश करता है. इसलिए उसके अंदर रिस्क बहुत कम होता है ।

Money Market funds :-

इस फंड को तरल उपकरणों में इनवेस्ट किया जाता है। यह Short term में निवेशकों के लिए उचित रिटर्न प्रदान करता हैं ।

Sector Mutual Fund :-

म्यूचुअल फंड जो किसी विशेष क्षेत्र या उद्योग में निवेश करते हैं, वे क्षेत्र-विशिष्ट फंड हैं चूंकि ऐसे म्युचुअल फंडों के में एक विशेष प्रकार के क्षेत्र या सेक्टर में निवेश होता है, इसलिए ऐसे फंडों में विविधता कम पायी जाती है और उन्हें जोखिम भरा माना जाता है।

INDEX FUND

यह एक इक्विटी फण्ड ही होता है| यह बाजार के प्रदर्शन के साथ चलता है | इसमे बाजार के इंडेक्स में में शामिल top शेयर में निवेश किया जाता है | यानि BSE sensex में शामिल 30 कंपनीयों  में निवेश या  NSE nifty में शामिल 50 कंपनियों में निवेश।

GILT FUND :-

ये वे फंड हैं जो पूरी तरह से सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और बांड दरों में बदलाव से लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं ये फंड इक्विटी में सेक्टर फंड के समान हैं; उन्हें सावधानीपूर्वक निगरानी की आवश्यकता होती है और ये डेब्ट फण्ड की उच्चतम जोखिम श्रेणी हैं।

अब मैं समझता हूँ कि लगभग सभी मुख्य म्यूच्यूअल फण्ड की जानकारी हो गई होगी ।अब अगले अंक में बारी बारी से सभी मुख्य म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में बताऊँगा ।

धन्यवाद ।

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